राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल (131वां संशोधन विधेयक, 2026) के लोकसभा में गिर जाने को मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी करार दिया है।
अनुराग शर्मा ने कहा कि इस बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े, जबकि भाजपा की लोकसभा में कुल संख्या मात्र 240 के आसपास है। इससे साफ झलकता है कि भाजपा और विपक्ष के बीच संख्या बल का फर्क सिर्फ 10 सांसदों का रह गया है, जिसे कभी भी बदला जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा, “महिला आरक्षण बिल तो संसद में वर्ष 2023 में पहले ही पास हो चुका है, जिसे वर्ष 2029 में लागू किया जाना है। अगर मोदी सरकार इसे वर्ष 2027 में लागू करना चाहती थी, तो 2023 का मूल बिल ही प्रस्तुत करना चाहिए था, जिसे कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष पहले ही सर्वसम्मति से समर्थन दे चुका है।”
अनुराग शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने सरकार को 2023 के मूल बिल को प्रस्तुत करने की सलाह दी थी, लेकिन सरकार महिला आरक्षण की आड़ में अपना एजेंडा थोपना चाहती थी, जिसे देश ने नकार दिया।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी हमेशा महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण प्रदान करने की पुरजोर हिमायती रही है। पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण स्वर्गीय राजीव गांधी ने प्रदान किया था, जबकि भाजपा ने महिला आरक्षण के नाम पर मात्र राजनीति ही की है।”
अनुराग शर्मा ने भाजपा से सवाल किया, “जब इस बिल को पास करवाने के लिए आपके पास बहुमत ही नहीं था, तो आपने इसे संसद में पेश क्यों किया? इससे सरकार ने करोड़ों रुपये का खर्चा किया, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला। अब भाजपा इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना चाह रही है, लेकिन इसमें वह कतई कामयाब नहीं होगी।”
गौरतलब है कि कल लोकसभा में वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण बिल गिर गया। इसके साथ ही इससे जुड़े परिसीमन संबंधी अन्य बिल भी आगे नहीं बढ़ाए गए।
यह घटना संसद में विपक्ष की एकजुटता और संख्या बल की नई सच्चाई को उजागर करती है।
राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में गिरने पर तीखा हमला बोला
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