तीन महीने तक 51 बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे, जनदबाव पड़ा तो पहुंचे डेपुटेशन शिक्षक; अब स्थायी भर्ती करे सरकार – गौरव कुमार

Prince Kumar
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स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट, चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने कहा कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय किन्नू में पिछले लगभग तीन महीनों से शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही थी। विद्यालय में प्री-प्राइमरी के 13 तथा प्राथमिक के 38, कुल 51 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन लंबे समय तक केवल एक जेबीटी शिक्षक के भरोसे ही शिक्षा व्यवस्था संचालित होती रही। अन्य सभी शिक्षक पद रिक्त होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में भारी चिंता का माहौल था।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट, चिंतपूर्णी एवं विद्यार्थियों के अभिभावकों ने संयुक्त रूप से आवाज़ बुलंद की। एसडीएम अम्ब के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री, हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन भेजकर मांग की गई कि विद्यालय में जल्द से जल्द पर्याप्त शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की जाए तथा तब तक डेपुटेशन के आधार पर शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
गौरव कुमार ने बताया कि आज उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, ऊना से भेंट कर उन्हें भी मांग-पत्र सौंपा गया। इस दौरान उप निदेशक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा की। वहीं विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज्ञापन दिए जाने के दो दिन बाद, 24 जुलाई को ही विद्यालय में डेपुटेशन के आधार पर शिक्षकों की व्यवस्था कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि किन्नू स्कूल में डेपुटेशन पर शिक्षकों की तैनाती स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट, अभिभावकों और स्थानीय लोगों के संयुक्त जनदबाव का परिणाम है। यदि समय रहते यह मुद्दा न उठाया जाता तो 51 बच्चों की पढ़ाई और भविष्य दोनों गंभीर संकट में पड़ जाते।
गौरव कुमार ने कहा कि डेपुटेशन केवल अस्थायी व्यवस्था है, स्थायी समाधान नहीं। सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को कब तक अस्थायी व्यवस्थाओं के भरोसे रखा जाएगा। शिक्षा व्यवस्था में रिक्त पदों को समय पर नहीं भरना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय किन्नू के सभी रिक्त शिक्षक पदों पर युद्धस्तर पर नियमित एवं स्थायी नियुक्तियां की जाएं, ताकि भविष्य में बच्चों की पढ़ाई कभी बाधित न हो। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र स्थायी नियुक्तियां नहीं की गईं तो स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट अभिभावकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन और तेज करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा विभाग की होगी

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