विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री चिंतपूर्णी मंदिर की सुगम दर्शन प्रणाली में सामने आए करीब 80 संदिग्ध डिजिटल लेनदेन ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ लेनदेन में एक ही लेनदेन पहचान संख्या और मोबाइल नंबर के दोहराव की बात सामने आई है, जिसके बाद पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट, चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने कहा कि माता चिंतपूर्णी के दरबार में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ आता है। ऐसे में मंदिर की किसी भी व्यवस्था में वित्तीय अनियमितता या लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब सुगम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से सोमवार से शनिवार 300 रुपये और रविवार को 500 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, तो सरकार और मंदिर प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि श्रद्धालुओं से प्राप्त प्रत्येक रुपये का हिसाब किस प्रकार रखा जा रहा है।
गौरव कुमार ने सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि 80 संदिग्ध लेनदेन में कुल कितनी धनराशि शामिल है, कितनी राशि मंदिर न्यास के आधिकारिक खाते में जमा हुई, एक ही लेनदेन पहचान संख्या और मोबाइल नंबर का दोहराव कैसे हुआ, डिजिटल भुगतान व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी और इतनी बड़ी गड़बड़ी समय रहते सामने क्यों नहीं आई
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को अब केवल जांच का आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करवाकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस व्यवस्था में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर चूक कहाँ हुई।
गौरव कुमार ने मांग की कि पूरे मामले में क्यूआर संकेतक, बैंक अभिलेख, भुगतान माध्यम, लेनदेन पहचान संख्या और सभी डिजिटल भुगतानों का तकनीकी परीक्षण करवाया जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल से ज्यादा माता चिंतपूर्णी की पवित्र आस्था और लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा है। श्रद्धालुओं से वसूले जाने वाले पैसे का पूरा हिसाब पारदर्शी होना चाहिए।
गौरव कुमार ने दो टूक कहा कि माता चिंतपूर्णी के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था और उनके पैसों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार और प्रशासन को जनता के सामने जवाब देना ही होगा कि सुगम दर्शन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में 80 संदिग्ध लेनदेन की स्थिति आखिर पैदा कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
श्रद्धालुओं के पैसों का पूरा हिसाब जनता के सामने लाओ, दोषियों पर कार्रवाई करो,वरना सरकार और प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए आवाज और बुलंद की जाएगी।
