हिमाचल प्रदेश में जारी मानसूनी बारिश के बीच दूषित पानी से पनपने वाली बीमारियों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए राज्य का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षकों और जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को विशेष चौकसी बरतने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
विभिन्न क्षेत्रों से अस्पतालों में डायरिया, पीलिया और उल्टी-दस्त के मामले सामने आने लगे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य तंत्र को उपचार, प्रभावी निगरानी और रोकथाम के लिए मुस्तैद रहने को कहा गया है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस (ORS), आईवी फ्लूड्स (IV Fluids) और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित कर लिया गया है।
मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत निर्देश
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त्वरित उपचार व रिपोर्टिंग: मरीजों की समय पर जाँच और इलाज के साथ-साथ गंभीर मामलों की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों को देने के निर्देश दिए गए हैं।
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निगरानी दल मुस्तैद: जिला स्तर पर बीमारियों के फैलाव पर नज़र रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति या आउटब्रेक से तुरंत निपटा जा सके।
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जन-जागरूकता अभियान: आम जनता को पानी उबालकर पीने, बासी खाने से बचने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
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पेयजल की शुद्धता: जल शक्ति विभाग से पानी के स्रोतों की नियमित क्लोरीनेशन और जलापूर्ति की सख्त निगरानी करने का अनुरोध किया गया है।
स्वास्थ्य सचिव का संदेश:
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने बताया कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा सुविधाओं का पर्याप्त इंतज़ाम है। उन्होंने जनता से अपील की है कि बरसात के मौसम में सतर्क रहें। उल्टी, दस्त, पीलिया या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखने पर खुद से दवा (Self-medication) लेने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डॉक्टर से परामर्श लें।
