चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने प्रदेश के मक्का उत्पादक किसानों को फसल में फॉल आर्मीवर्म (स्पोडोप्टेरा फ्रुजीपर्डा) के संभावित प्रकोप के प्रति सतर्क रहने तथा इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक एवं समेकित कीट प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी है।
कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरजीत कुमार ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म मक्का की एक अत्यंत विनाशकारी इल्ली है, जो समय पर नियंत्रण न किए जाने पर फसल को भारी क्षति पहुँचा सकती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें तथा पत्तियों पर खिड़कीनुमा क्षति, अनियमित छिद्र, पौधों की बीच वाली पत्तियों (व्हॉर्ल) में इल्ली एवं उसके मल की उपस्थिति जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाएँ।
उन्होंने बताया कि इस कीट के प्रभावी नियंत्रण के लिए समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाना सबसे उपयुक्त उपाय है। इसके अंतर्गत खेतों की नियमित निगरानी, अण्ड समूहों एवं इल्लियों का यांत्रिक विनाश, खेत की स्वच्छता बनाए रखना, प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण तथा वयस्क पतंगों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करना चाहिए। रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग केवल आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार करना चाहिए।
विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग न करें तथा फसल में किसी भी प्रकार के कीट प्रकोप की स्थिति में निकटतम कृषि विज्ञान केन्द्र अथवा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक परामर्श प्राप्त करें। समय पर निगरानी एवं वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर फॉल आर्मीवर्म से होने वाली क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा मक्का की बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है।
यह भी सलाह दी जाती है कि फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक होने अथवा आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय की अनुशंसा के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी @ 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी @ 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है। छिड़काव करते समय दवा का घोल मक्का के पौधे के व्हॉर्ल (बीच की पत्ती) तक अच्छी तरह पहुँचे तथा अनुशंसित मात्रा एवं आवश्यक सुरक्षा उपायों का पूर्णतः पालन किया जाए।
कृषि विश्वविद्यालय ने मक्का उत्पादक किसानों को फॉल आर्मीवर्म के समेकित प्रबंधन अपनाने की दी सलाह
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