वेदव्यास परिसर द्वारा संस्कृत-सप्ताह-महोत्सव के अवसर पर 145 विविध कार्यक्रमों का सामूहिक सम्पूर्ति समारोह

Prince Kumar
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केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदव्यास परिसर बलाहर द्वारा संस्कृत भारती (हिमाचल प्रदेश) न्यास एवं स्थानीय 15 संस्थाओं के संयुक्त तत्त्वावधान में विगत 17 तारीख से 31 अगस्त तक आयोजित संस्कृत सप्ताह महोत्सव का समापन समारोह सोमवार को परिसर के भरतमण्डप में आयोजित किया गया।
समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि राजकीय उच्च विद्यालय सरड डोगरी में कार्यरत परिसर की पूर्व छात्रा रीना कुमारी ने शिरकत की।वहीं सारस्वतातिथि के रूप में राजकीय उच्च विद्यालय बढ़ूईं में सेवारत परिसर की ही पूर्व छात्रा एवं वर्तमान में संस्कृत प्राध्यापिका कुमारी मोनिका शामिल हुईं।
वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर सहनिदेशक प्रो.मञ्जुनाथ एस.जि. ने की।
वेदव्यास परिसर के प्रभारी निदेशक प्रो मंजूनाथ ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत आयोजित इस संस्कृत सप्ताह महोत्सव के अवसर पर परिसर, समीपस्थ विद्यालयों तथा सामाजिक क्षेत्र में 145 कार्यक्रम आयोजित किए गए।
जिनमें 21 संस्कृतसम्भाणशिविर, 15 स्थानों पर संस्कृत वस्तुप्रदर्शिनी, 15 तिलककरण कार्यक्रम, 15 शुभकामना प्रदान कार्यक्रम, 13 संस्कृत सूक्तिलेखन प्रतियोगिताएं, 14 श्लोकोच्चारण प्रतियोगिताएँ, 13 संस्कृतक्रीडा प्रतियोगिताएँ, 13 संस्कृत गीतप्रतियोगिताएँ, 13 लघुकथा कथनप्रतियोगिताएँ और 13 शुभकामनाचार्ट प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं ।
जिसमें विद्यालय स्तर पर 297 छात्र-छात्राओं ने प्रथम-द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त किए । इस महोत्सव में लगभग 6,230 प्राध्यापकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं तथा सामाजिक लोगों ने भागग्रहण किया । संस्कृत सप्ताह समिति के संयोजक डॉ. पंकज ने उपस्थित अतिथियों का परिचय प्रदान कर संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों का प्रास्ताविक कथन किया।
समापन कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रीनाकुमारी ने समुपस्थित सभागणों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत सप्ताह के अवसर पर जिस संस्था से मुझे शिक्षाप्राप्त करने का अवसर मिला, उसके द्वारा मुझे सम्मानित किया जाना मेरे लिए गौरव की बात है । हम सभी अच्छे से अपना अध्ययन करते हुए संस्कृत के प्रचार-प्रसार कार्य में तत्पर रहें तथा जनभाषा के रूप में इस भाषा को बढ़ावा देने का कार्य करें। जिससे संस्कृत विद्यार्थियों को उत्तरोत्तर सुविधाएँ संस्कृताध्ययन हेतु भविष्य में प्राप्त हों।
मुख्यातिथि उद्बोधनोपरांत सारस्वतातिथि के रूप में उपस्थित परिसर की पूर्व छात्रा कुमारी मोनिका ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरे लिए गर्व का दिन है जो मुझे अपने अधीत परिसर में आकर सम्मानित किया गया ।
सारस्वतातिथि उद्बोधन के उपरांत इस महोत्सव के दौरान आयोजित विविध प्रतियोगिताओं में भागग्रहण किए प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण किया गया ।
पुरस्कार वितरण के उपरांत परिसर के प्रभारी निदेशक व सहनिदेशक प्रो.मञ्जुनाथ एस्.जि. ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में समस्त छात्रों, प्राध्यापकों व कर्मचारियों का संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु आवाहन करते हुए कहा कि हम सभी को इस भाषा के शास्त्रीय अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर प्रचार-प्रसार की दृष्टि से यथासामर्थ्य योगदान देना चाहिए । जिससे इसमें निहित समस्त ज्ञानस्रोतों का सदुपयोग आधुनिक परिप्रेक्ष्यों में समन्वय स्थापित करने, राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में विकासमार्ग की दिशानिर्धारण करने व वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समस्त जीवों के कल्याण मार्ग को प्रशस्त करने में किया जा सके ।
कार्यक्रम के अंत में परिसर के इतिहास विषय के प्राध्यापक संस्कृत सप्ताह समिति के सदस्य डॉ. लकेश कुमार ने उपस्थित सभी सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस संस्कृतसप्ताह महोत्सव का आयोजन डॉ.पंकज, सहायकाचार्य, साहित्यविद्याशाखा के संयोजकत्व तथा डॉ.प्रतिज्ञा आर्या, सहायकाचार्या, शिक्षाशास्त्रविद्याशाखा के सहसंयोजकत्व में किया गया ।
इस अवसर पर परिसरीय संस्कृतसप्ताह समिति के सभी सदस्य डॉ.पंकज, डॉ.प्रतिज्ञा आर्या, डॉ.गोविन्दशुक्ला, डॉ.हरि ओम, डॉ.विनोदशर्मा, डॉ.शैलेशकुमारतिवारी, डॉ.लकेशकुमार, वीरेन्द्र, विविध विद्याशाखाओं के संयोजक, आचार्यगण, समस्त कार्यालय कर्मचारी व छात्र उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम का संचालन ज्योतिष विद्याशाखा के प्राध्यापक डॉ. शैलेश कुमार तिवारी ने किया।

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