हिमाचल प्रदेश की राजनीति में दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने प्रदेश में एक ‘तीसरे मोर्चे’ के गठन की औपचारिक पुष्टि कर दी है। हमीरपुर में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की जनता अब कांग्रेस और भाजपा से इतर एक मजबूत विकल्प की तलाश में है।
12 जिलों में बिछाया जा रहा है जाल
डॉ. मार्कंडेय ने बताया कि वे प्रदेश के सभी 12 जिलों में प्रभावशाली और समान विचारधारा वाले नेताओं के साथ संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है। शुरुआती चरणों में कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और बिलासपुर का दौरा पूरा हो चुका है और जल्द ही कांगड़ा व चंबा में बड़ी बैठकें प्रस्तावित हैं।
बागी और असंतुष्ट नेताओं का साथ
इस नए मोर्चे की सबसे बड़ी ताकत भाजपा और कांग्रेस के वे वरिष्ठ नेता बन सकते हैं जो वर्तमान नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। डॉ. मार्कंडेय के अनुसार:
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कई पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक इस नए गठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार हैं।
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हाल ही में कुल्लू में हुई एक ‘सीक्रेट मीटिंग’ में करीब 40 दिग्गज नेताओं ने भविष्य की रणनीति पर चर्चा की है।
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ब्लॉक और जिला स्तर पर कमेटियों का गठन कर सीधे जनता से संवाद किया जाएगा।
जनता की राय से बनेगा घोषणापत्र
डॉ. मार्कंडेय का कहना है कि वे केवल सत्ता के लिए नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम लोगों की नब्ज टटोल रहे हैं। जनता की शिकायतों और सुझावों के आधार पर ही पार्टी का विजन डॉक्यूमेंट (घोषणापत्र) तैयार किया जाएगा।” हालांकि सोलन और सिरमौर जैसे क्षेत्रों में अभी शुरुआती प्रतिक्रियाएं कम मिली हैं, लेकिन आगामी दौरों में वहां भी संगठन को धार दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
हिमाचल में पारंपरिक रूप से मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा है, लेकिन हालिया वर्षों में निर्दलीयों और बागियों के बढ़ते प्रभाव ने तीसरे मोर्चे के लिए जगह बनाई है। मार्कंडेय की यह सक्रियता मुख्य दलों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।