ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को उतराला में आयुष ग्राम कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस पहल के तहत गांव को आयुष ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा।इस अवसर पर उपस्थित उपमंडल आयुष चिकित्सा अधिकारी बैजनाथ डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि आयुष ग्राम कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता को आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लाभों से अवगत करवाना है। उन्होंने कहा कि इन पद्धतियों के माध्यम से न केवल बीमारियों का उपचार संभव है, बल्कि नियमित दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर कई रोगों से बचाव भी किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, औषधीय पौधों के उपयोग और योग के नियमित अभ्यास के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि ग्रामीण स्तर पर ही स्वास्थ्य संरक्षण को मजबूत किया जा सके।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। डॉ. कुलविंदर कौर ने “लोकल हेल्थ फॉर प्रिवेंटिव हेल्थ केयर” विषय पर जानकारी देते हुए स्थानीय संसाधनों के माध्यम से स्वास्थ्य संरक्षण के उपाय बताए। वहीं सचिन शर्मा ने औषधीय पौधों की ऑर्गेनिक फार्मिंग पर विस्तार से प्रकाश डाला और ग्रामीणों को हर्बल पौधों की खेती के लिए प्रेरित किया। डॉ. रंजना कपूर ने महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए स्वास्थ्य से जुड़े आवश्यक सुझाव दिए।
इस अवसर पर आयुष विभाग और ग्रामवासियों द्वारा जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें लोगों को योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा अपनाने का संदेश दिया गया।डॉ. सुनील कुमार ने ग्रामवासियों से अपील करते हुए बताया कि 16 मार्च, सोमवार को आयुष ग्राम उतराला में आयुष मेले का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान आयुष विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ आयुर्वेदिक परामर्श भी दिया जाएगा। उन्होंने सभी ग्रामवासियों से मेले में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर इसका लाभ उठाने की अपील की।
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