51 विद्यार्थी, शून्य शिक्षक, तीन महीने से किन्नू स्कूल में शिक्षा व्यवस्था ठप- सरकार पर बरसे गौरव कुमार

Prince Kumar

चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली राजकीय प्राथमिक पाठशाला किन्नू में करीब 51 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि पिछले लगभग तीन महीनों से विद्यालय में एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना शिक्षक के 51 विद्यार्थियों की पढ़ाई कैसे चल रही है और प्रदेश सरकार इन विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कितनी गंभीर है,

स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर सरकार स्कूलों को बंद और डिनोटिफाई करने में लगी हुई है, वहीं दूसरी ओर 51 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में तीन महीने से एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं किया गया है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि 51 विद्यार्थी कोई आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश का भविष्य हैं। पिछले तीन महीनों से विद्यालय में एक भी शिक्षक का न होना सरकार और शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर तीन महीने से 51 विद्यार्थियों की पढ़ाई शिक्षक के बिना क्यों छोड़ी गई है? क्या सरकार को इन विद्यार्थियों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है?

गौरव कुमार ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। सरकार एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर 51 विद्यार्थियों वाले स्कूल में तीन महीने से एक भी शिक्षक नहीं है। सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर अब जनता के सामने साफ दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास स्कूलों को डिनोटिफाई करने के लिए समय और नीतियां हैं, तो 51 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में शिक्षक नियुक्त करने के लिए भी सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। विद्यार्थियों की शिक्षा किसी भी प्रकार की सरकारी लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।

स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट चिंतपूर्णी प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से पुरजोर मांग करता है कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला किन्नू में तत्काल प्रभाव से शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि 51 विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रह सके और उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। सरकार इस मामले में बिना किसी देरी के ठोस कदम उठाए।

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