चिंतपूर्णी में दो राजकीय महाविद्यालय बंद करने के फैसले पर घमासान, भाजयुमो उपाध्यक्ष सुमेश कुमार बिट्टू का सरकार पर तीखा प्रहार

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चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र में दो राजकीय महाविद्यालयों को बंद करने के प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष सुमेश कुमार बिट्टू ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे क्षेत्र और विशेष रूप से छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार सुनियोजित तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है।
सुमेश कुमार बिट्टू ने प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह बेटियों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के दूरदराज इलाकों से आने वाली कई छात्राएं इन महाविद्यालयों पर निर्भर थीं। कॉलेज बंद होने से उन्हें या तो लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी या फिर पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकार एक भी नया शिक्षण संस्थान शुरू नहीं कर पाई है। इसके विपरीत, पूर्व सरकारों द्वारा खोले गए शिक्षण संस्थानों पर ताले लगाने का काम लगातार किया जा रहा है। बिट्टू ने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की कोई स्पष्ट नीति नहीं है और निर्णय केवल राजनीतिक आधार पर लिए जा रहे हैं।
इस मुद्दे पर उन्होंने चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू को भी घेरते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुदर्शन सिंह बबलू स्वयं को विधानसभा क्षेत्र का “बेटा” बताते हैं, लेकिन जब क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया तो उनकी ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
बिट्टू ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उस समय सुदर्शन सिंह बबलू को टिकट नहीं मिला था, तब उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी थी। लेकिन अब, जब मौजूदा सरकार द्वारा उनके ही विधानसभा क्षेत्र में दो कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया गया है, तो वे चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधायक के “मुंह में दही जम चुकी है” और वे केवल व्यक्तिगत स्वार्थ के मुद्दों पर ही सक्रिय दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस जनता ने विश्वास जताकर सुदर्शन सिंह बबलू को विधायक बनाया, उसी जनता के हक और बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए यदि वे आवाज नहीं उठा सकते, तो यह क्षेत्र की जनता के साथ विश्वासघात है। बिट्टू ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और दूरदृष्टि की आवश्यकता है।
भारतीय जनता पार्टी ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। सुमेश कुमार बिट्टू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र में व्यापक और उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को इस फैसले के खिलाफ जागरूक करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा।
चिंतपूर्णी क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों और छात्रों में भी रोष देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता ग्रामीण युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इन्हें बंद करना क्षेत्र के विकास को पीछे धकेलने जैसा है।
अब देखना यह होगा कि प्रदेश सरकार इस विरोध के बीच अपने निर्णय पर पुनर्विचार करती है या नहीं। फिलहाल, चिंतपूर्णी में दो महाविद्यालयों को बंद करने का मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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