हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HPSAMB) की वर्ष 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और विधायक राकेश जमवाल ने इस रिपोर्ट के हवाले से सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’ को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ऑडिट रिपोर्ट के 3 बड़े खुलासे:
राकेश जमवाल ने ऑडिट रिपोर्ट के तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए कहा कि विभाग के खातों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं:
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बेहिसाब अग्रिम राशि: लगभग 110 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस राशि का न तो कहीं हिसाब है और न ही इसका कोई समुचित समायोजन (Adjustment) किया गया है।
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डिपॉजिट कार्यों में अंतर: विभाग के डिपॉजिट कार्यों के खातों में करीब 49 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर सामने आया है, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
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कर्मचारी भविष्य निधि (CPF) में विसंगति: कर्मचारियों के सीपीएफ खातों और बैंक बैलेंस के आंकड़ों में मेल न होना वित्तीय प्रबंधन के पूरी तरह चरमराने का संकेत है।
“अन्नदाताओं के साथ अन्याय”
जमवाल ने कहा कि विकास कार्यों और किसानों के नाम पर जारी की गई भारी-भरकम राशि का सही उपयोग न होना प्रदेश के अन्नदाताओं के साथ धोखा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में न विकास हुआ और न ही पारदर्शिता आई; उल्टा भ्रष्टाचार के नए अध्याय खुल गए हैं।
सरकार से पूछे तीखे सवाल:
भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री से सीधे तीन सवाल किए हैं:
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₹110 करोड़ की भारी राशि वास्तव में कहाँ खर्च हुई?
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₹49 करोड़ का वित्तीय अंतर कैसे पैदा हुआ?
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क्या इस भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण देने वालों और दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज होगी?
आंदोलन की चेतावनी
राकेश जमवाल ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं की और जवाबदेही तय नहीं की, तो भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन छेड़ेगी।